आज फिर मैंने ज़्ज़बात ही भेजा है
Saturday, November 18, 2017
Monday, November 21, 2016
कागज़ के अल्फ़ाज़
अब वो ममता भी नहीं न वो दौर रही ,
सुकून है उन कागज़ के अलफ़ाज़ से ,
चीख भी लो और आवाज़ नहीं
Friday, September 30, 2016
दास्ताँ लकीरों की ....
मंज़र पता नहीं , कारवाँ चलती रही
लम्हें गुजरतें रहें , पर दास्तां कहीं नहीं
फलसफा कुछ ऐसा ,
तेरी आहट और कुछ हवा का झौका ,
असर कुछ ऐसा उन निगाहों की ,
कारवाँ थमी , पर दास्ताँ फिरभी नहीं
वो निगाहें ; पर जाने कहाँ मंज़र ,
वो लब्ज़ , वो मुस्कराहटें ; पर जाने कहाँ मंज़र
लम्हें तो गुज़रते पर लम्हों का फ़कीर
दास्ताँ तो बस हाथों की लकीर।।।
लम्हें गुजरतें रहें , पर दास्तां कहीं नहीं
फलसफा कुछ ऐसा ,
तेरी आहट और कुछ हवा का झौका ,
असर कुछ ऐसा उन निगाहों की ,
कारवाँ थमी , पर दास्ताँ फिरभी नहीं
वो निगाहें ; पर जाने कहाँ मंज़र ,
वो लब्ज़ , वो मुस्कराहटें ; पर जाने कहाँ मंज़र
लम्हें तो गुज़रते पर लम्हों का फ़कीर
दास्ताँ तो बस हाथों की लकीर।।।
Tuesday, September 3, 2013
My Cloud 9
There is no one that sticks around as you,
No soul that showers content as you,
No Chimes As deep as You,
No laughter as beautiful as you ,
No Names as awakening as You,
No "Hiiiii " as Beautiful as You
The Moments of my 2009
ARE MY CLOUD 9.
For the moments thereafter,
Looking, Longing, Hanging ,
Right under the sky,
Up gazing at Sky
So many clouds
So much to gaze
None I say mine
None My Cloud 9
Wonder, my LOST CLOUD 9............
I MISS SO MUCH 2009
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